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सोमवार, 26 अप्रैल 2021

हमारे आंगन में भी बहार आई है

सुनो आज फिर तुम्हारी याद आई है,
पैगाम तुम्हारा फ़िज़ा लाई है,

खिला है दरीचे में एक फूल नन्हा सा,
हमारे आंगन में भी बहार आई है.