विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
चाय
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चाय
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सोमवार, 18 अक्टूबर 2021
मिन्नतों के बाद खुदा ने मिलाया था उसे
एक तन्हा शाम चाय पर देखा था उसे,
बड़ी चाहत भरी नजरों से देखा था उसे,
अफसोस आज फिर वही तन्हा शाम है,
मिन्नतों के बाद खुदा ने मिलाया था उसे.
बात भी नही करती वो
पहली बार देखा था,
चाय पर मिली थी वो,
आज कल नाराज़ है,
बात भी नही करती वो.
रविवार, 23 मई 2021
ज़िन्दगी में सरीक हो जाना
चाहता हूं चाय हो जाना,
दोस्ती की महक हो जाना,
नुक्कड़ की शान हो जाना,
ज़िन्दगी में सरीक हो जाना.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
गरम चाय सी तुम
कुछ खोई सी तुम,
कुछ जागी सी तुम,
सुबह की ठंडक में,
गरम चाय सी तुम.
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