उड़ता फिरू इन वादियों में.
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शुक्रवार, 14 मई 2021
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
मुकम्मल कर मुझे
मैं यादों का खण्डर हूं,
आबाद कर मुझे,
बिखरा हूं इन फिज़ाओं में,
महसूस कर मुझे,
ए यार सुन,
मेरी दास्तां दफ़्न है यहीं,
अपने अल्फ़ाज़ों में गढ़ और,
मुकम्मल कर मुझे.
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