विशाल_सरोज
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सफर
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सोमवार, 18 अक्टूबर 2021
अभी तो पूरा आसमान बाकी है
अभी तो चलना शुरू किया है,
अभी तो पूरा सफर बाकी है,
अभी तो आई है कश्ती समंदर में,
अभी तूफानों से टकराना बाकी है,
अभी तो बस खोले है पंख थोड़े,
अभी तो पूरा आसमान बाकी है.
मंगलवार, 25 मई 2021
सफर में हूं
दरिया हूं,
बहता हूं,
रुकता नही,
सफर में हूं.
हमेशा सफर में पाओगे
मुझे छोड़ भी जाओगे,
तो भी आबाद पाओगे,
बहते पानी सा हूं, मुझे
हमेशा सफर में पाओगे.
शनिवार, 22 मई 2021
तो हर सफर सुहाना
हमसफ़र हो तुम सा,
तो हर सफर सुहाना.
गुरुवार, 20 मई 2021
खुदा मिला है
जब तक जिंदा है,
सिलसिला है ..
मौत पर मेरी,
किसको गिला है ..
कहाँ किसी को मुकम्मल
जहान मिला है ..
गुरबत में हसीं फूल,
कहाँ खिला है ..
भटकते ही कटी ज़िन्दगी,
कहाँ किसी को
खुदा मिला है.
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