विशाल_सरोज
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शनिवार, 22 मई 2021
यूं ही नही कोई बरगद होता
पत्तों, फलों, टहनियों से,
यूं ही नही कोई भरा होता,
सींचना पड़ता है पसीने से,
यूं ही नही कोई बरगद होता.
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