विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
लब
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लब
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शनिवार, 5 जून 2021
ये लबों की लाली
पागल कर रही हैं,
तेरी आंखें काली,
मेंहदी की खुशबू,
ये लबों की लाली.
शनिवार, 22 मई 2021
लबों से बयां कहां होती है
कुछ कहा सा,
कुछ फुसफुसाया,
इज़हार-ए-मोहब्बत,
लबों से बयां कहां होती है.
क्या कहिए
नाज़ुकी लबों की,
हया आंखों की,
क्या कहिए ..
क्या कहिए ..
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
ये झील सी गहरी आंखें, आंखों में काजल काला
ये झील सी गहरी आंखें,
आंखों में काजल काला,
ये सुर्ख लाल से लब,
लबों पे मय का प्याला,
ये प्यारा सा बर्थडे,
बर्थडे पे केक चॉकलेट वाला,
ये छुही मुही सी तुम,
और मैं तुमको चाहने वाला,
ये झील सी गहरी आंखें,
आंखों में काजल काला.
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