ज़ीया था कोई ज़िन्दगी, लोग कहेंगे.
ज़िन्दगी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ज़िन्दगी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 9 अगस्त 2022
तेरी इस तेज़ रफ़्तार की इंतहा कहां है
सोचता हूं सुकून के दो पल कहां है,
इस भागमभाग में ज़िन्दगी कहां है,
बचपन में मुकम्मल था यारों के संग,
इस भागमभाग में वो यारी कहां है,
कुछ छोड़ गए, कुछ छूट गए हमसे,
इस भागमभाग में ज़िंदगानी कहां है,
सोचता हूं शाम में अक्सर ऐ ज़िन्दगी!
तेरी इस तेज़ रफ़्तार की इंतहा कहां है.
मंगलवार, 25 मई 2021
रविवार, 23 मई 2021
ज़िन्दगी में सरीक हो जाना
चाहता हूं चाय हो जाना,
दोस्ती की महक हो जाना,
नुक्कड़ की शान हो जाना,
ज़िन्दगी में सरीक हो जाना.
गुरुवार, 20 मई 2021
रविवार, 16 मई 2021
सदस्यता लें
संदेश (Atom)