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मंगलवार, 9 अगस्त 2022

ज़ीया था कोई ज़िन्दगी, लोग कहेंगे

क्या! मौत मारेगी, क्या! हम मरेंगे,
ज़ीया था कोई ज़िन्दगी, लोग कहेंगे.

तेरी इस तेज़ रफ़्तार की इंतहा कहां है

सोचता हूं सुकून के दो पल कहां है,
इस भागमभाग में ज़िन्दगी कहां है,

बचपन में मुकम्मल था यारों के संग,
इस भागमभाग में वो यारी कहां है,

कुछ छोड़ गए, कुछ छूट गए हमसे,
इस भागमभाग में ज़िंदगानी कहां है,

सोचता हूं शाम में अक्सर ऐ ज़िन्दगी!
तेरी इस तेज़ रफ़्तार की इंतहा कहां है.

रविवार, 23 मई 2021

किस बात को गाता

किराए की है ज़िन्दगी,
कैसा रिश्ता, कैसा नाता,

किस बात को रोता,
किस बात को गाता.

ज़िन्दगी में सरीक हो जाना

चाहता हूं चाय हो जाना,
दोस्ती की महक हो जाना,

नुक्कड़ की शान हो जाना,
ज़िन्दगी में सरीक हो जाना.

जी सकते है ज़िन्दगी

बोतल बंद पानी सी
हो गई है ज़िन्दगी,

कीमत चुका कर ही
जी सकते है ज़िन्दगी.