विशाल_सरोज
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गुरुवार, 27 मई 2021
सूरत तेरी
याद आती है
गौर करने पर
सूरत तेरी
इश्क़ में रात
रात न हुई
दुश्मन हुई कोई
इश्क़ में रात
इश्क़ में रात
रात न हुई
दुश्मन हुई कोई
इश्क़ में रात
क्या गुनाह है
इबादत में
तेरी याद आती है
क्या गुनाह है
इश्क़ में हमें
मिली थी तुम
वैसे कोई न मिला
इश्क़ में हमें
लाजवाब है
अंदाज़ तेरे
लिखने का और है
लाजवाब है
तेरे इश्क़ में
हुआ है फिर
मेरा दिल बंजारा
तेरे इश्क़ में
बुधवार, 26 मई 2021
हूर हो क्या
ये बतलाओ
सुंदर हो बहुत
हूर हो क्या
मैं डूबा जहां
कस्ती थी वहां
समंदर किनारे
मैं डूबा जहां
वो मेरा नही
मैं पागल हूं
जिसकी चाहत में
वो मेरा नही
मैं, मैं न रहा
कुछ हुआ यूं
तेरे जाने के बाद
मैं, मैं न रहा
दिल की त्रास
बैठोगे पास
तो बताएंगे तुम्हें
दिल की त्रास
कैसे है हम
आओगे तुम
तब ये बताएंगे
कैसे है हम
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