विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
हक़ीक़त
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सोमवार, 11 अक्टूबर 2021
लोग तालियां बजाते रहे
हम हक़ीक़त लिखते रहे,
लोग अफ़साना समझते रहे,
हम दर्द लिखते रहे,
लोग तालियां बजाते रहे.
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