सोचता हूं सुकून के दो पल कहां है,
इस भागमभाग में ज़िन्दगी कहां है,
बचपन में मुकम्मल था यारों के संग,
इस भागमभाग में वो यारी कहां है,
कुछ छोड़ गए, कुछ छूट गए हमसे,
इस भागमभाग में ज़िंदगानी कहां है,
सोचता हूं शाम में अक्सर ऐ ज़िन्दगी!
तेरी इस तेज़ रफ़्तार की इंतहा कहां है.