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रविवार, 30 मई 2021

किस सड़क पर

वो खड़ी थी दूर वहां,
उस सड़क पर,
मैं दे न सका ख़त,
जिस सड़क पर,

कोई निशानी होती गर उसकी,
जी ही लेते,
वो मुझे न जाने मिलेगी,
किस सड़क पर.

सोमवार, 17 मई 2021

महसूस कर लेता हूं तुझे

वो तेरा ख़त मेरे नाम,
तेरी खुशबू से महकता,
कभी मिला था मुझे,

संभाल कर रखा है,
अकेले में छू लेता हूं,
महसूस कर लेता हूं तुझे.

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे

बिखरा हूं कई पन्नों में, समेट ले मुझे,
कि मैं एक किताब हूं, पढ़ ले मुझे,

चाहता हूं तेरे इश्क़ में 'ख़त' हो जाना,
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे.