विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
ख़त
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
ख़त
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 30 मई 2021
किस सड़क पर
वो खड़ी थी दूर वहां,
उस सड़क पर,
मैं दे न सका ख़त,
जिस सड़क पर,
कोई निशानी होती गर उसकी,
जी ही लेते,
वो मुझे न जाने मिलेगी,
किस सड़क पर.
सोमवार, 17 मई 2021
महसूस कर लेता हूं तुझे
वो तेरा ख़त मेरे नाम,
तेरी खुशबू से महकता,
कभी मिला था मुझे,
संभाल कर रखा है,
अकेले में छू लेता हूं,
महसूस कर लेता हूं तुझे.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे
बिखरा हूं कई पन्नों में, समेट ले मुझे,
कि मैं एक किताब हूं, पढ़ ले मुझे,
चाहता हूं तेरे इश्क़ में 'ख़त' हो जाना,
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे.
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)