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सोमवार, 18 अक्टूबर 2021

मिन्नतों के बाद खुदा ने मिलाया था उसे

एक तन्हा शाम चाय पर देखा था उसे,
बड़ी चाहत भरी नजरों से देखा था उसे,

अफसोस आज फिर वही तन्हा शाम है,
मिन्नतों के बाद खुदा ने मिलाया था उसे.

गुरुवार, 20 मई 2021

सोमवार, 17 मई 2021

मैं भी डूब सा जाता हूं

तू मिलती थी कभी जहां,
मैं उसी रेस्तरां जाता हूं,

डूबते हुए दिन के साथ,
मैं भी डूब सा जाता हूं.

गुरुवार, 29 अप्रैल 2021

मुझ में तुम

खुशनुमा शाम,
शाम में मंडप,
मंडप में तुम,

गुलाबी साड़ी,
साड़ी में घूंघट,
घूंघट में तुम,

सुर्ख चेहरा,
चेहरा पे हंसी,
हंसी में तुम,

झुकी आंखें,
आंखों में काजल,
काजल में तुम,

नाजुक हाथ,
हाथों में मेंहदी,
मेंहदी में तुम,

सात वचन,
वचनों में मैं,
मुझ में तुम.

सोमवार, 26 अप्रैल 2021

शाम में....मैं विशाल..

शाम में..

महसूस करता हूँ मैं,
मद्धिम पवन,
शीतल जल,

महसूस करता हूँ मैं,
चहकते पंछी,
नाचती तितलियां,

महसूस करता हूँ मैं,
खिलते फूल,
गुनगुनाते भंवरे,

महसूस करता हूँ मैं,
निश्छल प्रेम,
निस्वार्थ समर्पण..

नदी किनारे,
तेरी यादों के संग,
महसूस करता हूं,
खुद ही को बस,
शाम में....
मैं विशाल..

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

अब इस जहान में कोई हमारा नही है

हमारे हिस्से में हसीं शामें नही है,
दिल नही मानता कि तू हमारा नही है,

ख़ाक छानते रहे 'विशाल' दुनिया की,
अब इस जहान में कोई हमारा नही है.

जरा पीछे मुड़कर देखना

शाम को खेत की मेड़ पर बैठे..

सूरज को ढलते देखना,
मवेशियों को चरते देखना,
पंछियों को उड़ते देखना,

गांव में तेरा और क्या छूटा,
जरा पीछे मुड़कर देखना.