विशाल_सरोज
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महकाया
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शुक्रवार, 14 मई 2021
सांसों से महकाया जाए
सोचता हूं तेरी यादों को,
गमले में उगाया जाए,
अश्कों से सींचा जाए,
सांसों से महकाया जाए.
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