विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
तन्हाई
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
तन्हाई
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, 18 जून 2021
ये ही हमारी हमराज़ है
माना बहुत बुरे है हम,
आप हम से नाराज़ है,
ये तन्हाई बस साथ है,
ये ही हमारी हमराज़ है.
मुझसे दूर है, पर तू मुझे अच्छा लगता है
आजकल तन्हाई में भी अच्छा लगता है,
मुझसे दूर है, पर तू मुझे अच्छा लगता है.
मंगलवार, 25 मई 2021
जो किसी से सच्चा प्यार करते है
अक्सर अकेले रह जाते है वो लोग,
जो किसी से सच्चा प्यार करते है.
सोमवार, 24 मई 2021
और कुछ भी नही
तन्हाई है, बेबसी है
और कुछ भी नही,
आंसुओं का साथ है
और कुछ भी नही,
जब तुम थी मेरे साथ,
तो सिर्फ तुम थी,
अब बस तेरी याद है
और कुछ भी नही.
सोमवार, 10 मई 2021
मैं रात का इंतज़ार करता हूं
जब तन्हाई से बात करता हूं,
तेरा ज़िक्र हर बार करता हूं,
तन्हाई तुझ में खोई रहती है,
मैं रात का इंतज़ार करता हूं.
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
फिर क्यो तन्हाई में बिखर जाता हूं
तेरी सदा* से संवर जाता हूं,
तेरी बाहों में निखर आता हूं,
लोग कहते है पत्थर हूं, फिर
क्यो तन्हाई में बिखर जाता हूं.
*सदा = आवाज़
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)