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सोमवार, 24 मई 2021

और कुछ भी नही

तन्हाई है, बेबसी है
और कुछ भी नही,
आंसुओं का साथ है
और कुछ भी नही,

जब तुम थी मेरे साथ,
तो सिर्फ तुम थी,
अब बस तेरी याद है
और कुछ भी नही.

सोमवार, 10 मई 2021

मैं रात का इंतज़ार करता हूं

जब तन्हाई से बात करता हूं,
तेरा ज़िक्र हर बार करता हूं,

तन्हाई तुझ में खोई रहती है,
मैं रात का इंतज़ार करता हूं.

गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

फिर क्यो तन्हाई में बिखर जाता हूं

तेरी सदा* से संवर जाता हूं,
तेरी बाहों में निखर आता हूं,

लोग कहते है पत्थर हूं, फिर
क्यो तन्हाई में बिखर जाता हूं.

*सदा = आवाज़