विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
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मंगलवार, 18 मई 2021
या फिर दुनिया तुम्हारी नही होती
दोस्ती किताबों की अच्छी नही होती,
या तो तुम दुनिया के नही होते,
या फिर दुनिया तुम्हारी नही होती.
रविवार, 16 मई 2021
अब ख्वाबों में मिलेंगे
कुछ किताबों में मिलेंगे,
कुछ वादों में मिलेंगे,
बिखर गए है तेरे बिना,
अब ख्वाबों में मिलेंगे.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे
बिखरा हूं कई पन्नों में, समेट ले मुझे,
कि मैं एक किताब हूं, पढ़ ले मुझे,
चाहता हूं तेरे इश्क़ में 'ख़त' हो जाना,
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे.
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