विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
सुबह
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गुरुवार, 20 मई 2021
हल्की धूप सी
रात के बाद ..
नई सुबह .. ..
बारिश के बाद,
हल्की धूप सी.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
कहीं खो जाऊं
काश!
हिमालय की वादियों में,
सर्दी की एक सुबह,
खामोशी ओढ़े हुए देवदारों,
को छू कर आती,
ओस की शीतल फुहारों से,
भीगी सकरी सीढ़ियों को,
चढ़ कर बादलों में,
कहीं खो जाऊं.
गरम चाय सी तुम
कुछ खोई सी तुम,
कुछ जागी सी तुम,
सुबह की ठंडक में,
गरम चाय सी तुम.
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