विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
घर
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
घर
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 10 अप्रैल 2022
ये ऊँची इमारतें रास नही आतीं
वो टेढ़े-मेढ़े रास्तें भाते है मुझे,
ये सीधी सड़कें रास नही आतीं,
वो कच्चा घर याद आता है मुझे,
ये ऊँची इमारतें रास नही आतीं.
मंगलवार, 25 मई 2021
इन्हें कौन शौक से उठाता है
हर कोई बच्चों के लिए कमाता है,
पर कभी बचपन भी घर चलाता है,
ये ज़िम्मेदारियां है आ जाती है,
इन्हें कौन शौक से उठाता है.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
हिमालय की तलहटी में एक घर हो
हिमालय की तलहटी में एक घर हो,
छोटा दालान हो, वृहद चारागाह हो,
नीला आसमान हो, ऊँचा पहाड़ हो,
हिमालय की तलहटी में एक घर हो.
गांव अपना छोड़ आया
अनमोल खजाना छोड़ आया,
अपनी आजादी छोड़ आया,
मैं दो जून की रोटी को
गांव अपना छोड़ आया,
मिट्टी की सौंधी खुशबू,
आमों के बाग छोड़ आया,
नदिया का बहता पानी,
बूढ़ी मां को छोड़ आया,
पिंजरे से घर के खातिर,
मंदिर अपना छोड़ आया.
मैं दो जून की रोटी को,
गांव अपना छोड़ आया.
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)