विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
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शुक्रवार, 18 जून 2021
हासिल कर लोगे उनको
हम सजदा करे उनको,
हम प्यार करे उनको,
तुम हथेलियों की लकीरों से,
हासिल कर लोगे उनको.
ये ही हमारी हमराज़ है
माना बहुत बुरे है हम,
आप हम से नाराज़ है,
ये तन्हाई बस साथ है,
ये ही हमारी हमराज़ है.
शनिवार, 5 जून 2021
तुम में कुछ हम भी है
हम में कुछ तुम भी हो,
तुम में कुछ हम भी है.
शुक्रवार, 28 मई 2021
कितने गिर गए हम
जबसे मर गए हम,
रुसवा कर गए हम,
ज़माने की नज़र में,
कितने गिर गए हम.
मंगलवार, 25 मई 2021
हम पर क्या गुज़रती है
शोख हवाएं जब तेरी
ज़ुल्फों को छेड़ती हैं,
हम क्या बताए, हम
पर क्या गुज़रती है.
गुरुवार, 20 मई 2021
शनै: शनै: बीतते हम
शनै: शनै: बढ़ते तुम,
शनै: शनै: बीतते हम.
सोमवार, 17 मई 2021
हम खुद से ही शर्मिंदा हैं
जो पास तू मेरे होता,
मैं इस कदर न रोता,
कोई ऐसे रूठता है क्या,
कोई ऐसे जाता है क्या,
माना सब ख़ता है मेरी,
नही कोई भी ख़ता तेरी,
वापस आजा मेरे प्यार,
मुआफ़ कर दे मेरे यार,
तेरे लिए ही तो ज़िंदा हैं,
हम खुद से ही शर्मिंदा हैं.
सोमवार, 26 अप्रैल 2021
तेरे चाहने वाले बाकी सारे होंगे
चांद होगा, सितारें होंगे,
महफ़िल में दोस्त सारे होंगे,
एक हमी न होंगे वहां,
तेरे चाहने वाले बाकी सारे होंगे.
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