विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
पागल
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
पागल
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 5 जून 2021
ये लबों की लाली
पागल कर रही हैं,
तेरी आंखें काली,
मेंहदी की खुशबू,
ये लबों की लाली.
ओ सजनी तेरे लिए
पागल है मेरा दिल,
ओ सजनी तेरे लिए.
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)