विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
ज़िंदगी
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शनिवार, 23 अप्रैल 2022
ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी
देखो! तुम्हारे आने से,
दवा असर करने लगी,
देखो! एक बार फिर,
ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी.
सोमवार, 18 अक्टूबर 2021
जाने कबसे उनके इंतज़ार में है
ज़िन्दगी सुन!
ठहर ज़रा,
रास्तों को सहला दूं,
जाने कबसे उनके इंतज़ार में है.
रविवार, 30 मई 2021
जो तुम्हें पालती है
एक गुरु ज़िन्दगी है,
जो तुम्हें संवारती है,
एक गुरु प्रकृति है,
जो तुम्हें पालती है.
गुरुवार, 20 मई 2021
खुदा मिला है
जब तक जिंदा है,
सिलसिला है ..
मौत पर मेरी,
किसको गिला है ..
कहाँ किसी को मुकम्मल
जहान मिला है ..
गुरबत में हसीं फूल,
कहाँ खिला है ..
भटकते ही कटी ज़िन्दगी,
कहाँ किसी को
खुदा मिला है.
रविवार, 16 मई 2021
बताना तो सही
क्या हुआ हासिल,
मुझ से रूठ कर,
ज़िन्दगी एक बार,
बताना तो सही.
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