विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
आंख
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आंख
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शनिवार, 5 जून 2021
वो नीचे अपनी ज़मी है
किस बात की कमी है,
आंखों में क्यों नमी है,
होगा आसमान उसका,
वो नीचे अपनी ज़मी है.
मंगलवार, 25 मई 2021
इश्क़ का पागलपन
आंखों का सूनापन,
सागर का खारापन,
नही देखा जाता, ये
इश्क़ का पागलपन.
शनिवार, 22 मई 2021
क्या कहिए
नाज़ुकी लबों की,
हया आंखों की,
क्या कहिए ..
क्या कहिए ..
गुरुवार, 20 मई 2021
आंखें तुम्हारी
तुम्हें देखें कि,
आंखें तुम्हारी,
मेरी जान ही..
ले लेंगी ये .. ..
आंखें तुम्हारी.
कमाल करती हो
ये जो तुम आंखों
से बात करती हो,
कमाल करती हो.
तो आंख भर आती है
अब खुश भी होते है,
तो आंख भर आती है.
रविवार, 25 अप्रैल 2021
याद तुम्हारी लाई है
घनघोर घटा छाई है,
आंख मेरी भर आई है,
ये हसीं रुत संग अपने,
याद तुम्हारी लाई है.
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
करती मुझे बेकरार
पलकों से इजहार,
आंखों से इनकार,
शरारतें आंखों की,
करती मुझे बेकरार.
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