विशाल_सरोज
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शुक्रवार, 14 मई 2021
तुमने हमारी ज़िंदगानी नही देखी
सांझ में चौंधियां गई आंखें तुम्हारी,
तुमने हमारी दोपहर नही देखी.
मरते हुए से जो इतना खौफ है,
तुमने हमारी ज़िंदगानी नही देखी.
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