विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
ख्वाब
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ख्वाब
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रविवार, 16 मई 2021
अब ख्वाबों में मिलेंगे
कुछ किताबों में मिलेंगे,
कुछ वादों में मिलेंगे,
बिखर गए है तेरे बिना,
अब ख्वाबों में मिलेंगे.
गुरुवार, 13 मई 2021
क्रिकेट, पंचांग के बारे में बतलाए थे
कल रात ख्वाब में 'विश्वास' आए थे,
पानी की बोतल भी साथ लाए थे,
हुआ न मशवरा कोई कविता, शायरी का,
क्रिकेट, पंचांग के बारे में बतलाए थे.
बुधवार, 28 अप्रैल 2021
कि नींद भी नही आती … तेरे बिना
ये नही कि,
रह नही सकते … तेरे बिना,
पर कुछ छूटा सा है … तेरे बिना,
ख्वाब भी कोई क्या देखें,
कि नींद भी नही आती … तेरे बिना.
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
इश्क़ में कहां कोई सोता है
इश्क़ बेवजह होता है, तभी तो,
आसमां ज़मीं के लिए रोता है,
कहते हो ख्वाबो में आओगे,
इश्क़ में कहां कोई सोता है.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
अलसाई आंखों से दीदार तेरा
ख्वाबों की हसीन रात के बाद,
अलसाई आंखों से दीदार तेरा.
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