विशाल_सरोज
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आसमां
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आसमां
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बुधवार, 2 जून 2021
अनंत है इच्छायें
न पूरा आसमाँ
ही मिला किसी को,
न पूरी ही हुई
किसी की इच्छायें,
पर फिर भी उड़ना
कहाँ मना है, ये
आसमाँ अनंत है,
अनंत है इच्छायें.
एक ज़मीं मेरी भी है
छोड़ गया वो मुझे तो,
कुछ कमी मेरी भी है,
है तिरा पूरा आस्मां,
एक ज़मीं मेरी भी है.
रविवार, 23 मई 2021
पंखों में कहां इतनी जान होती है
हौसलों से होते हैं आसमां फतह,
पंखों में कहां इतनी जान होती है.
बुधवार, 28 अप्रैल 2021
कायनात जी उठी
नदियां जी उठी,
आसमां जी उठा,
पंछी, हवा और,
दरख़्त जी उठे,
इंसां क्या रुका,
कायनात जी उठी.
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
इश्क़ में कहां कोई सोता है
इश्क़ बेवजह होता है, तभी तो,
आसमां ज़मीं के लिए रोता है,
कहते हो ख्वाबो में आओगे,
इश्क़ में कहां कोई सोता है.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
तू ही गुमां
मैं जमीं, तू आसमां,
मैं पतझड़, तू समां,
है तू ही मेरा यकीं,
तू ही मेरा गुमां.
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