विशाल_सरोज
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शनिवार, 22 मई 2021
भावों से भरना
कितना मुश्किल होता है,
विचारों के बीहड़ में,
खुद को खुला छोड़ना,
कितना मुश्किल होता है,
कागज़ के सूनेपन को
भावों से भरना.
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