विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
जीना
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मंगलवार, 18 मई 2021
तुम्हें छूना चाहता हूं
तुम्हें जीना चाहता हूं,
तुम्हें लिखना चाहता हूं,
घुल कर हवाओं में,
तुम्हें छूना चाहता हूं.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
नाम उसी का रहता है
सपनों के लिए जो जीता है,
सपनों के लिए जो मरता है,
रहती दुनिया तक,
नाम उसी का रहता है.
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