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सोमवार, 11 अक्टूबर 2021

जो तुम हम से बात नही करते

इश्क़ करते हो, इज़हार नही करते,
याद करते हो, मुलाक़ात नही करते,

बताओ किस बात की सज़ा है ये,
जो तुम हम से बात नही करते.

सोमवार, 24 मई 2021

और कुछ भी नही

तन्हाई है, बेबसी है
और कुछ भी नही,
आंसुओं का साथ है
और कुछ भी नही,

जब तुम थी मेरे साथ,
तो सिर्फ तुम थी,
अब बस तेरी याद है
और कुछ भी नही.

रविवार, 23 मई 2021

इश्क़ में इश्क़ कर बैठे रात के साथ

तेरी याद गहराती है रात के साथ,
दर्द बढ़ता जाता है रात के साथ,

मुझे सख्त नपसंद थी रात, पर तेरे
इश्क़ में इश्क़ कर बैठे रात के साथ.

और खुद को 'अश्क़' लिखता हूं

फटी डायरी में ख़्वाब लिखता हूं,
हमारे इश्क़ की दास्तां लिखता हूं,

सुनो ! मैं तुम्हें 'याद' लिखता हूं,
और खुद को 'अश्क़' लिखता हूं.

सोमवार, 17 मई 2021

कैसे भूलूं, कैसे याद मैं करूं

कैसे भूलूं, कैसे याद मैं करूं,
यादों को तेरी मैं सहेज के धरूं,

कैसे भूलूं, कैसे याद मैं करूं,
कैसे भूलूं, कैसे याद मैं करूं.

शुक्रवार, 14 मई 2021

टोकने की माफी भी देती जाओ

जा रही हो मुझे छोड़ कर तो,
इत्मीनान से जाओ, पर सुनो..
मुझपर एक एहसान करती जाओ,

यादों के बस एक लम्हें के बदले,
अपने सारे गम मुझे देती जाओ,
मेरी तमाम खुशियां लेती जाओ,

सुना है .. पीर, फकीरों से.. कि,
जाने वालों को टोकते नही, सो,
टोकने की माफी भी देती जाओ.

सांसों से महकाया जाए

सोचता हूं तेरी यादों को,
गमले में उगाया जाए,
अश्कों से सींचा जाए,
सांसों से महकाया जाए.

तुझे खबर हो जाए

मेरे इश्क़ में इतना असर हो जाए,
मैं याद करू, तुझे खबर हो जाए.

सोमवार, 26 अप्रैल 2021

हमारे आंगन में भी बहार आई है

सुनो आज फिर तुम्हारी याद आई है,
पैगाम तुम्हारा फ़िज़ा लाई है,

खिला है दरीचे में एक फूल नन्हा सा,
हमारे आंगन में भी बहार आई है.

रविवार, 25 अप्रैल 2021

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

मुकम्मल कर मुझे

मैं यादों का खण्डर हूं,
आबाद कर मुझे,
बिखरा हूं इन फिज़ाओं में,
महसूस कर मुझे,

ए यार सुन,
मेरी दास्तां दफ़्न है यहीं,
अपने अल्फ़ाज़ों में गढ़ और,
मुकम्मल कर मुझे.