विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
प्यार
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प्यार
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शुक्रवार, 18 जून 2021
हासिल कर लोगे उनको
हम सजदा करे उनको,
हम प्यार करे उनको,
तुम हथेलियों की लकीरों से,
हासिल कर लोगे उनको.
गुरुवार, 3 जून 2021
मोहब्बत को पाक़ मानने वालों
ये तुम उर्दू को जानने वालों,
ग़ालिब, तक़ी को मानने वालों,
ये तुम मिरे सूफ़ी कुछ कहो तो,
मोहब्बत को पाक़ मानने वालों.
मंगलवार, 25 मई 2021
जो किसी से सच्चा प्यार करते है
अक्सर अकेले रह जाते है वो लोग,
जो किसी से सच्चा प्यार करते है.
रविवार, 16 मई 2021
तुम्हे कितना प्यार करते है
बेसबब, बेख़बर से इश्क़ में
हम तुम्हारा इंतज़ार करते है.
लौट आओ ये देखने हम,
तुम्हे कितना प्यार करते है.
शुक्रवार, 14 मई 2021
इज़हार-ए-इश्क़ फ़रमाते रहिए
प्यार करते है तो जताते रहिए,
हाल-ए दिल भी बताते रहिए,
ज़नाब, खुश करने महबूब को,
इज़हार-ए-इश्क़ फ़रमाते रहिए.
गुरुवार, 13 मई 2021
पर बताना नही आता
प्यार करता हूं तुमसे,
पर जताना नही आता,
फिक्र करता हूं तुम्हारी,
पर बताना नही आता.
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
तू मुझे अपना सा लगा
आज चांद बेचैन सा लगा,
जाने क्यों तुझ सा लगा,
पहली ही मुलाक़ात में,
तू मुझे अपना सा लगा.
तुझे जाने दिया
मैं खफ़ा हूं खुद से, जो तुझे जाने दिया,
तेरा शुक्रिया, तूने मुझे मर जाने दिया,
चाहता तो तुझे जान से भी ज्यादा था,
पर तेरी खुशी के लिए, तुझे जाने दिया.
बस गीत तेरे ही गाऊ मैं
तुझे ओढ़ कर सो जाऊ मैं,
तेरे सपनों में खो जाऊ मैं,
है अब यही दिल की तमन्ना,
बस गीत तेरे ही गाऊ मैं.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
तू बुलाएगी भी तो, लौटूंगा नही
तुझे जाना है तो जा, रोकूंगा नही,
तुझे याद कर के मैं, रोऊंगा नही,
इतनी दूर चला जाऊंगा तुझसे,
तू बुलाएगी भी तो, लौटूंगा नही.
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे
बिखरा हूं कई पन्नों में, समेट ले मुझे,
कि मैं एक किताब हूं, पढ़ ले मुझे,
चाहता हूं तेरे इश्क़ में 'ख़त' हो जाना,
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे.
मुकम्मल कर मुझे
मैं यादों का खण्डर हूं,
आबाद कर मुझे,
बिखरा हूं इन फिज़ाओं में,
महसूस कर मुझे,
ए यार सुन,
मेरी दास्तां दफ़्न है यहीं,
अपने अल्फ़ाज़ों में गढ़ और,
मुकम्मल कर मुझे.
बड़े प्यारे से लगते हो
पत्तियों से झांकता गुलाब,
और खिड़की में खड़ी तुम,
दोनों एक से लगते हो,
बड़े प्यारे से लगते हो.
जो मुझे बुलाता है
कुछ तो है इन पहाड़ों में,
जो मुझे लुभाता है,
पुराना प्यार है शायद,
जो मुझे बुलाता है.
अलसाई आंखों से दीदार तेरा
ख्वाबों की हसीन रात के बाद,
अलसाई आंखों से दीदार तेरा.
गरम चाय सी तुम
कुछ खोई सी तुम,
कुछ जागी सी तुम,
सुबह की ठंडक में,
गरम चाय सी तुम.
हम बेवफा हो, ऐसा तो नही
तुझ से इश्क़ नही, ऐसा तो नही,
तेरी परवाह नही, ऐसा तो नही,
फिर क्यों ज़िंदा है, तेरे बगैर
हम बेवफा हो, ऐसा तो नही.
मुझे तुम सा सताना नही आता
मुझे प्यार जताना नही आता,
हाल-ए-दिल बताना नही आता,
ये जो तुम हर बात पर रूठ जाते हो,
मुझे तुम सा सताना नही आता.
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