विशाल_सरोज
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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021
ऐ मेरे बुजुर्ग गांव
ऐ मेरे बुजुर्ग गांव,
तेरे अलाव की वो कहानियां,
तेरी नदियों में वो नहाना,
तेरे खेतो की वो फसले,
तेरे साथ मेरा वो बचपन,
तेरी मिट्टी की वो खुशबू,
मुझे हरदम याद आती है,
ऐ मेरे बुजुर्ग गांव.
बुधवार, 28 अप्रैल 2021
मुझे ढूंढती तो होंगी
सोचता हूं..
शहर के बियाबां से,
गांव की ओर,
कोई पगडंडी जाती तो होगी,
आज भी बूढ़े बरगद की आंखें,
मुझे ढूंढती तो होंगी.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
जरा पीछे मुड़कर देखना
शाम को खेत की मेड़ पर बैठे..
सूरज को ढलते देखना,
मवेशियों को चरते देखना,
पंछियों को उड़ते देखना,
गांव में तेरा और क्या छूटा,
जरा पीछे मुड़कर देखना.
गांव अपना छोड़ आया
अनमोल खजाना छोड़ आया,
अपनी आजादी छोड़ आया,
मैं दो जून की रोटी को
गांव अपना छोड़ आया,
मिट्टी की सौंधी खुशबू,
आमों के बाग छोड़ आया,
नदिया का बहता पानी,
बूढ़ी मां को छोड़ आया,
पिंजरे से घर के खातिर,
मंदिर अपना छोड़ आया.
मैं दो जून की रोटी को,
गांव अपना छोड़ आया.
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