विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
वजूद
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
वजूद
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
सोमवार, 26 अप्रैल 2021
तख्त-नशीं का पहले ज़मीर कत्ल होता है
ये सियासत है, यहां किरदारों का कत्ल होता है,
इंसान ज़िंदा रहता है, वजूद कत्ल होता है,
यूं ही नही मिलता तख्त किसी को,
तख्त-नशीं का पहले ज़मीर कत्ल होता है.
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)