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गुरुवार, 20 मई 2021

हम बारिश में भीगा करते थे

अब तो चेहरा भी याद नही,
जिन्हें पर्स में लिए फिरते थे,

कभी जिनके फूलों के खातिर,
हम बारिश में भीगा करते थे.

मंगलवार, 18 मई 2021

फूलों संग इतना क्यों इतराती हो

तितली रानी जरा ये तो बताओ,
ये खूबसूरत रंग कहां से लाती हो,

इतने सुंदर पंख कहां से पाती हो,
फूलों संग इतना क्यों इतराती हो.

सोमवार, 26 अप्रैल 2021

हमारे आंगन में भी बहार आई है

सुनो आज फिर तुम्हारी याद आई है,
पैगाम तुम्हारा फ़िज़ा लाई है,

खिला है दरीचे में एक फूल नन्हा सा,
हमारे आंगन में भी बहार आई है.