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मंगलवार, 9 अगस्त 2022

तेरी इस तेज़ रफ़्तार की इंतहा कहां है

सोचता हूं सुकून के दो पल कहां है,
इस भागमभाग में ज़िन्दगी कहां है,

बचपन में मुकम्मल था यारों के संग,
इस भागमभाग में वो यारी कहां है,

कुछ छोड़ गए, कुछ छूट गए हमसे,
इस भागमभाग में ज़िंदगानी कहां है,

सोचता हूं शाम में अक्सर ऐ ज़िन्दगी!
तेरी इस तेज़ रफ़्तार की इंतहा कहां है.

शुक्रवार, 14 मई 2021

तुमने हमारी ज़िंदगानी नही देखी

सांझ में चौंधियां गई आंखें तुम्हारी,
तुमने हमारी दोपहर नही देखी.

मरते हुए से जो इतना खौफ है,
तुमने हमारी ज़िंदगानी नही देखी.