विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
प्रकृति
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रविवार, 30 मई 2021
जो तुम्हें पालती है
एक गुरु ज़िन्दगी है,
जो तुम्हें संवारती है,
एक गुरु प्रकृति है,
जो तुम्हें पालती है.
मंगलवार, 18 मई 2021
लिखना चाहता हूं
नन्हे कोपल सी
एक कविता
लिखना चाहता हूं
प्रकृति को समर्पित
एक काव्य
लिखना चाहता हूं
शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021
कि रोती है मां, तुम्हे आंचल में छुपा कर
ये बारिश नहीं प्रकृति का विलाप है,
कि रोती है मां, तुम्हे आंचल में छुपा कर.
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