विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
चांद
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चांद
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मंगलवार, 25 मई 2021
थोड़ा संवारा सजाया जाए
सूरज का मुंह धुलाया जाए,
थोड़ा आईना दिखाया जाए,
चांद को भा जाए शायद,
थोड़ा संवारा सजाया जाए.
शनिवार, 22 मई 2021
चांद तन्हा पिघलता है
कभी तो रही होगी
मोहब्बत इनके बीच,
तभी तो..
दिन के सूनेपन में
सूरज तन्हा जलता है,
रात की खामोशी में
चांद तन्हा पिघलता है.
दुनिया इसे ग्रहण कहती है
आगोश में है चांद सूरज के,
दुनिया इसे ग्रहण कहती है.
रविवार, 16 मई 2021
मेरे चांद सा तेरा चेहरा
रात के स्याह अंधेरे में,
मेरे चांद सा तेरा चेहरा.
सोमवार, 26 अप्रैल 2021
तेरे चाहने वाले बाकी सारे होंगे
चांद होगा, सितारें होंगे,
महफ़िल में दोस्त सारे होंगे,
एक हमी न होंगे वहां,
तेरे चाहने वाले बाकी सारे होंगे.
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
तू मुझे अपना सा लगा
आज चांद बेचैन सा लगा,
जाने क्यों तुझ सा लगा,
पहली ही मुलाक़ात में,
तू मुझे अपना सा लगा.
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