विशाल_सरोज
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तख्त
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सोमवार, 26 अप्रैल 2021
तख्त-नशीं का पहले ज़मीर कत्ल होता है
ये सियासत है, यहां किरदारों का कत्ल होता है,
इंसान ज़िंदा रहता है, वजूद कत्ल होता है,
यूं ही नही मिलता तख्त किसी को,
तख्त-नशीं का पहले ज़मीर कत्ल होता है.
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