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गुरुवार, 6 मई 2021

लगती हो इठलाती, इतराती हुई

तुझे देखता हूँ ऐ नदी जब यूँ सूखी हुई,
लगता है गलती कुछ हमसे ही हुई,

जब बहती हो तुम बारिश में कलकलाती हुई,
लगती हो इठलाती, इतराती हुई.

शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

ऐ मेरे बुजुर्ग गांव

ऐ मेरे बुजुर्ग गांव,
तेरे अलाव की वो कहानियां,
तेरी नदियों में वो नहाना,
तेरे खेतो की वो फसले,
तेरे साथ मेरा वो बचपन,
तेरी मिट्टी की वो खुशबू,
मुझे हरदम याद आती है,
ऐ मेरे बुजुर्ग गांव.

सोमवार, 26 अप्रैल 2021

शाम में....मैं विशाल..

शाम में..

महसूस करता हूँ मैं,
मद्धिम पवन,
शीतल जल,

महसूस करता हूँ मैं,
चहकते पंछी,
नाचती तितलियां,

महसूस करता हूँ मैं,
खिलते फूल,
गुनगुनाते भंवरे,

महसूस करता हूँ मैं,
निश्छल प्रेम,
निस्वार्थ समर्पण..

नदी किनारे,
तेरी यादों के संग,
महसूस करता हूं,
खुद ही को बस,
शाम में....
मैं विशाल..