विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
हवा
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हवा
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मंगलवार, 25 मई 2021
हम पर क्या गुज़रती है
शोख हवाएं जब तेरी
ज़ुल्फों को छेड़ती हैं,
हम क्या बताए, हम
पर क्या गुज़रती है.
बुधवार, 28 अप्रैल 2021
कायनात जी उठी
नदियां जी उठी,
आसमां जी उठा,
पंछी, हवा और,
दरख़्त जी उठे,
इंसां क्या रुका,
कायनात जी उठी.
सोमवार, 26 अप्रैल 2021
शाम में....मैं विशाल..
शाम में..
महसूस करता हूँ मैं,
मद्धिम पवन,
शीतल जल,
महसूस करता हूँ मैं,
चहकते पंछी,
नाचती तितलियां,
महसूस करता हूँ मैं,
खिलते फूल,
गुनगुनाते भंवरे,
महसूस करता हूँ मैं,
निश्छल प्रेम,
निस्वार्थ समर्पण..
नदी किनारे,
तेरी यादों के संग,
महसूस करता हूं,
खुद ही को बस,
शाम में....
मैं विशाल..
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