विशाल_सरोज
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मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे
बिखरा हूं कई पन्नों में, समेट ले मुझे,
कि मैं एक किताब हूं, पढ़ ले मुझे,
चाहता हूं तेरे इश्क़ में 'ख़त' हो जाना,
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे.
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