हिमालय लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हिमालय लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 23 मई 2021

बल बढ़ता गया

दल बढ़ता गया,
बल बढ़ता गया,
हौसलों पे हो सवार,
मन बढ़ता गया..

कुछ तूने किया,
कुछ मैंने किया,
कुछ अपने आप,
मुकम्मल हो गया..

न थकें कभी,
न रुकें कभी,
हिमालय को भी,
फतह करें अभी..

दल बढ़ता गया,
बल बढ़ता गया.

गुरुवार, 20 मई 2021

दिल लेके जाओगी किधर

बर्फ से ढ़के ऊंचे शिखर,
हैं चहुँ ओर देखो जिधर,

ये हिमालय है मेरी 'तमन्ना',
दिल लेके जाओगी किधर.

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

कहीं खो जाऊं

काश!
हिमालय की वादियों में,
सर्दी की एक सुबह,
खामोशी ओढ़े हुए देवदारों,
को छू कर आती,
ओस की शीतल फुहारों से,
भीगी सकरी सीढ़ियों को,
चढ़ कर बादलों में,
कहीं खो जाऊं.

हिमालय की तलहटी में एक घर हो

हिमालय की तलहटी में एक घर हो,
छोटा दालान हो, वृहद चारागाह हो,

नीला आसमान हो, ऊँचा पहाड़ हो,
हिमालय की तलहटी में एक घर हो.