विशाल_सरोज
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सूरज
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मंगलवार, 25 मई 2021
थोड़ा संवारा सजाया जाए
सूरज का मुंह धुलाया जाए,
थोड़ा आईना दिखाया जाए,
चांद को भा जाए शायद,
थोड़ा संवारा सजाया जाए.
शनिवार, 22 मई 2021
चांद तन्हा पिघलता है
कभी तो रही होगी
मोहब्बत इनके बीच,
तभी तो..
दिन के सूनेपन में
सूरज तन्हा जलता है,
रात की खामोशी में
चांद तन्हा पिघलता है.
दुनिया इसे ग्रहण कहती है
आगोश में है चांद सूरज के,
दुनिया इसे ग्रहण कहती है.
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