विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
रूठना
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रूठना
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सोमवार, 17 मई 2021
हम खुद से ही शर्मिंदा हैं
जो पास तू मेरे होता,
मैं इस कदर न रोता,
कोई ऐसे रूठता है क्या,
कोई ऐसे जाता है क्या,
माना सब ख़ता है मेरी,
नही कोई भी ख़ता तेरी,
वापस आजा मेरे प्यार,
मुआफ़ कर दे मेरे यार,
तेरे लिए ही तो ज़िंदा हैं,
हम खुद से ही शर्मिंदा हैं.
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
तू बुलाएगी भी तो, लौटूंगा नही
तुझे जाना है तो जा, रोकूंगा नही,
तुझे याद कर के मैं, रोऊंगा नही,
इतनी दूर चला जाऊंगा तुझसे,
तू बुलाएगी भी तो, लौटूंगा नही.
मुझे तुम सा सताना नही आता
मुझे प्यार जताना नही आता,
हाल-ए-दिल बताना नही आता,
ये जो तुम हर बात पर रूठ जाते हो,
मुझे तुम सा सताना नही आता.
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