मोहब्बत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मोहब्बत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 3 जून 2021

मोहब्बत को पाक़ मानने वालों

ये तुम उर्दू को जानने वालों,
ग़ालिब, तक़ी को मानने वालों,

ये तुम मिरे सूफ़ी कुछ कहो तो,
मोहब्बत को पाक़ मानने वालों.

शनिवार, 22 मई 2021

चांद तन्हा पिघलता है

कभी तो रही होगी
मोहब्बत इनके बीच,

तभी तो..

दिन के सूनेपन में
सूरज तन्हा जलता है,

रात की खामोशी में
चांद तन्हा पिघलता है.

लबों से बयां कहां होती है

कुछ कहा सा,
कुछ फुसफुसाया,
इज़हार-ए-मोहब्बत,
लबों से बयां कहां होती है.

सोमवार, 17 मई 2021

एक बार फिरसे दिल लगा लेते है

चलो कह दो तुम अपने दिल की,
हम भी हाल-ए-दिल बता देते है,

चलो कर भी दो तुम मुआफ़ हमें,
एक बार फिरसे दिल लगा लेते है.

पर बताना नही चाहता

कुछ उलझनें है जिन्हें
सुलझाना नही चाहता,
मोहब्बत तो है तुम से
पर बताना नही चाहता.

गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

तू मुझे अपना सा लगा

आज चांद बेचैन सा लगा,
जाने क्यों तुझ सा लगा,

पहली ही मुलाक़ात में,
तू मुझे अपना सा लगा.

तुझे जाने दिया

मैं खफ़ा हूं खुद से, जो तुझे जाने दिया,
तेरा शुक्रिया, तूने मुझे मर जाने दिया,

चाहता तो तुझे जान से भी ज्यादा था,
पर तेरी खुशी के लिए, तुझे जाने दिया.

बस गीत तेरे ही गाऊ मैं

तुझे ओढ़ कर सो जाऊ मैं,
तेरे सपनों में खो जाऊ मैं,

है अब यही दिल की तमन्ना,
बस गीत तेरे ही गाऊ मैं.

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

तू बुलाएगी भी तो, लौटूंगा नही

तुझे जाना है तो जा, रोकूंगा नही,
तुझे याद कर के मैं, रोऊंगा नही,

इतनी दूर चला जाऊंगा तुझसे,
तू बुलाएगी भी तो, लौटूंगा नही.

तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे

बिखरा हूं कई पन्नों में, समेट ले मुझे,
कि मैं एक किताब हूं, पढ़ ले मुझे,

चाहता हूं तेरे इश्क़ में 'ख़त' हो जाना,
तू लिख कर मुकम्मल कर दे मुझे.

मुकम्मल कर मुझे

मैं यादों का खण्डर हूं,
आबाद कर मुझे,
बिखरा हूं इन फिज़ाओं में,
महसूस कर मुझे,

ए यार सुन,
मेरी दास्तां दफ़्न है यहीं,
अपने अल्फ़ाज़ों में गढ़ और,
मुकम्मल कर मुझे.

बड़े प्यारे से लगते हो

पत्तियों से झांकता गुलाब,
और खिड़की में खड़ी तुम,

दोनों एक से लगते हो,
बड़े प्यारे से लगते हो.

अलसाई आंखों से दीदार तेरा

ख्वाबों की हसीन रात के बाद,
अलसाई आंखों से दीदार तेरा.

गरम चाय सी तुम

कुछ खोई सी तुम,
कुछ जागी सी तुम,

सुबह की ठंडक में,
गरम चाय सी तुम.

हम बेवफा हो, ऐसा तो नही

तुझ से इश्क़ नही, ऐसा तो नही,
तेरी परवाह नही, ऐसा तो नही,

फिर क्यों ज़िंदा है, तेरे बगैर
हम बेवफा हो, ऐसा तो नही.

मुझे तुम सा सताना नही आता

मुझे प्यार जताना नही आता,
हाल-ए-दिल बताना नही आता,

ये जो तुम हर बात पर रूठ जाते हो,
मुझे तुम सा सताना नही आता.