विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
अश्क
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रविवार, 23 मई 2021
और खुद को 'अश्क़' लिखता हूं
फटी डायरी में ख़्वाब लिखता हूं,
हमारे इश्क़ की दास्तां लिखता हूं,
सुनो ! मैं तुम्हें 'याद' लिखता हूं,
और खुद को 'अश्क़' लिखता हूं.
शुक्रवार, 14 मई 2021
सांसों से महकाया जाए
सोचता हूं तेरी यादों को,
गमले में उगाया जाए,
अश्कों से सींचा जाए,
सांसों से महकाया जाए.
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