मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

गांव अपना छोड़ आया

अनमोल खजाना छोड़ आया,
अपनी आजादी छोड़ आया,

मैं दो जून की रोटी को
गांव अपना छोड़ आया,

मिट्टी की सौंधी खुशबू,
आमों के बाग छोड़ आया,

नदिया का बहता पानी,
बूढ़ी मां को छोड़ आया,

पिंजरे से घर के खातिर,
मंदिर अपना छोड़ आया.

मैं दो जून की रोटी को,
गांव अपना छोड़ आया.

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