गुरुवार, 13 मई 2021

कभी जागा सा, कभी सोया सा

मेरा इश्क़..

कभी धूप सा,
कभी छाया सा.

कभी खोया सा,
कभी पाया सा.

कभी जागा सा,
कभी सोया सा.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें