विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
सोमवार, 24 मई 2021
कुछ घाव दिखाने है
मेरी हमनवा, मेरी तमन्ना,
किसी शाम साथ बैठो,
कुछ राज बताने है,
कुछ घाव दिखाने है.
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