शनिवार, 22 मई 2021

चांद तन्हा पिघलता है

कभी तो रही होगी
मोहब्बत इनके बीच,

तभी तो..

दिन के सूनेपन में
सूरज तन्हा जलता है,

रात की खामोशी में
चांद तन्हा पिघलता है.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें