विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
शनिवार, 22 मई 2021
चांद तन्हा पिघलता है
कभी तो रही होगी
मोहब्बत इनके बीच,
तभी तो..
दिन के सूनेपन में
सूरज तन्हा जलता है,
रात की खामोशी में
चांद तन्हा पिघलता है.
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