विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
मंगलवार, 18 मई 2021
जो उग आए आंगन में
मैं वो पंछी नही शायद,
जो उड़ता फिरें गगन में,
यकीनन वो घास हूं मैं,
जो उग आए आंगन में.
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