विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
शुक्रवार, 28 मई 2021
किसी हुनर से तो तोड़ो मुझे
अकेला ही हूं आजमाइश में,
किसी हुनर से तो तोड़ो मुझे.
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