शुक्रवार, 14 मई 2021

असि मैं न उठाऊंगा

पहले हाथ न उठाऊंगा, जो
गिरा धरा पर मेरा एक,
तुम सब को मार गिराऊंगा,

तू अपने लश्कर के संग,
अपनी अय्यारी मुझ पर आजमाना,
मैं छल, कपट नही आजमाऊंगा,

तू फौलादी बख्तर में, अपने
सब हथियार ले कर आना,
मैं बस एक शमशीर लाऊंगा,

तू मुझ पर अपना हुनर
आजमाना, और सौ वार चलाना
मैं बस एक वार चलाऊंगा,

तू अगर फिर भी बच
गया, तो मैं अपनी मौत
का एक राज़ तुझे बताऊंगा,

तू मारना नवरात्रि में मुझे,
माता की सौगंध में बंधा
हूं, असि मैं न उठाऊंगा.

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